ऋषिकेश। ऋषिकेश के वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक जागरण के लंबे समय तक प्रभारी रहे हरीश तिवारी का मंगलवार सुबह एम्स ऋषिकेश में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से ऋषिकेश के पत्रकारिता एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
हरीश तिवारी लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे और उनका डायलिसिस चल रहा था। 10 अगस्त को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आपात स्थिति में एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। मंगलवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
पत्रकारिता में बनाई अलग पहचान
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार में जन्मे हरीश तिवारी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई। वह समसामयिक घटनाओं, राजनीति और अपराध से जुड़े विषयों पर अपनी पैनी नजर और स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे। दैनिक जागरण में लंबे समय तक प्रभारी के रूप में उन्होंने ऋषिकेश की पत्रकारिता को महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वह ऋषिकेश प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष तथा इसके संस्थापक सदस्यों में से एक थे। प्रेस क्लब की स्थापना और पत्रकारों को एक मंच पर लाने में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
‘दोस्तों के दोस्त’ थे हरीश तिवारी
हरीश तिवारी की पहचान केवल एक पत्रकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक जिंदादिल और मिलनसार इंसान के रूप में भी थी। उनके मित्र उन्हें ‘दोस्तों का दोस्त’ कहते थे। छोटे-बड़े सभी लोगों के साथ सहजता से घुल-मिल जाना उनके व्यक्तित्व की खासियत थी।
सामाजिक सरोकारों और पत्रकारिता के प्रति उनका समर्पण हमेशा देखने को मिलता था। उनके निधन से ऋषिकेश ने एक अनुभवी पत्रकार के साथ-साथ एक मिलनसार और संवेदनशील व्यक्तित्व को खो दिया है।
हरीश तिवारी अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। उनके निधन पर पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
हरीश तिवारी का जाना ऋषिकेश की पत्रकारिता के लिए एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई लंबे समय तक महसूस होती रहेगी।
